प्रथम स्थान
आयोजन- हिंदी दिवस
विधा- गीत
आधार छंद- सरसी
मात्रा विधान-१६,११=२७ अंत गाल
" हिन्दी भाषा "
हिन्द-देश के वासी हैं हम,हिन्दी अपनी शान।
हिन्दी से ही मान हमारा,हिन्दी ही पहचान।
निज भाषा का करो सदा सब,
नित आदर सत्कार।
रहो सभी से मिलजुल करके,
छोड़ो सब तकरार।
गर्व हमें हिन्दी भाषा पर,हिन्दी अपनी जान।
हिन्दी से ही मान हमारा,हिन्दी ही पहचान।
भटक गए हैं कुछ साथी तो,
उन्हें दिखाओ राह।
ठेस न पहुँचे कभी किसी को,
रखिए ऐसी चाह।
हिन्दी भाषा का सब मिलकर,करिए नित सम्मान।
हिन्दी से ही मान हमारा, हिन्दी ही पहचान।
बातचीत करिए हिन्दी में,
खास रहे या आम।
हिन्दी भाषा में ही हो अब,
सब सरकारी काम।
दर्ज राष्ट्रभाषा के पद पर,करिए सब अभिमान।
हिन्दी से ही मान हमारा, हिन्दी ही पहचान।
हिन्दी है बिन्दी के जैसे,
सदा बढ़ाती साज।
मधुर-मधुर हैं शब्दावलियाँ,
भाषा का है ताज।
लेन-देन हो सब हिन्दी में,रखिए इसका ध्यान।
हिन्दी से ही मान हमारा,हिन्दी ही पहचान।
स्वरचित
रामप्रसाद मीना 'लिल्हारे'
चिखला बालाघाट (म.प्र.)
प्रथम स्थान
नमन मंच--महाराष्ट्र कलम की सुगंध
तिथि--14/09/2020
विषय-- आलेख हिन्दी दिवस
हिन्दी:कल, आज और कल
*********************
हिन्दी हमारी मातृभाषा और हमारी राष्ट्रभाषा है। हमारे राष्ट्र के माथे की बिन्दी है। भाषा संप्रेषण का सशक्त साधन होता है। जीवंतता, स्वायत्तता तथा लचीलापन भाषा के प्रमुख लक्षण हैं। इसलिये देश में हिन्दी बोली जाने के आधार पर 14 सितंबर 1949 को संविधान की भाषा समिति ने हिंदी को राजभाषा पद पर स्वीकृत किया और 1963 में राजभाषा अधिनियम जारी हुआ। यही कारण है कि हम 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस के रुप में मनाते हैं।
साहित्यकारों ने हिन्दी के लिये बहुत कुछ किया।हिन्दी को अपनी लेखनी और साहित्य से समृद्ध किया है। आधुनिक हिन्दी के जनक कहे जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद ने कहा था अपनी भाषा की उन्नति में ही अपनी उन्नति है। आगे महावीर प्रसाद द्विवेदी,माखनलाल चतुर्वेदी,हज़ारी प्रसाद द्विवेदी,प्रेमचंद,निराला,पन्त,महादेवी वर्मा, बच्चन आदि ने हिन्दी को खूब समृद्ध किया है। आज भी हिन्दी में बहुत कुछ लिखा जा रहा है,,,पर हिन्दी भाषा के साथ एक बड़ी बिडंबना है। विश्व में ७० करोड़ लोग हिंदी भाषी हैं और यह तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। लेकिन हिंदी प्रचार प्रसार के लिए सरकार द्वारा जो समुचित कदम उठाये जाने चाहिये थे वो उन्होंने नहीं किया। भले ही विश्व के विश्व विद्यालयों में हिंदी अध्यापन हो रहा है परंतु विडंबना यह है कि हिंदी भाषा अपने ही घर में उपेक्षित ज़िन्दगी जी रही है। यहाँ गुड मॉर्निंग से सूर्योदय और गुडनाइट से सूर्यास्त होता है। हैप्पी बर्थ डे से जन्म और आर आई पी से मरण संदेश भेजे जाते हैं। सच पूछा जाये तो अंग्रेजी बोलने वाले को बुद्धिमान और हिंदी बोलने वालों को समाज में हेय दृष्टि से नहीं देखा जाता है। जब भी हिंदी दिवस आता है हम हिंदी पखवाड़ा मना कर "हिंदी मेरी शान हिंदी मेरी जान "बोल कर अपने कर्तव्य को पूरा कर लेते है। माता-पिता भी कम दोषी नहीं, जब वे अपने बच्चों को बोलना सिखाते हैं तब अपने बच्चे के आगे अंग्रेज़ी परोसने लगते हैं। हिंदी की दशा हमारी दोहरी नीति की शिकार हो गई है।
हिंदी को कभी सर्वश्रेष्ठ भाषा का दर्जा प्राप्त था। आज उसकी ऐसी दुर्दशा जिसे लोग बोलने में ,संदेश भेजने में शर्म का अनुभव करते हैं। अंग्रेज़ी में संवाद लिख या बोल कर अपने को संभ्रांत महसूस करते हैं। हिंदी और अंग्रेज़ी मिश्रित भाषा का प्रचलन (हिंगलिश) शहरों में तो आम बात है, अब तो गाँव में भी देखने, सुनने को मिलने लगा है।
हिंदी की दुर्दशा का आकलन तो इसी बात से लगाया जा सकता कि इंग्लिश मिडियम स्कूलों में हिंदी का आस्तित्व बचाने के लिए अनिवार्य विषय के रुप में पढ़ाने के लिए सरकार को प्रयास करने पड़ रहे हैं। विदेशी भाषा के ज़ंजीर से जकड़ी हिंदी को दोयम का दर्जा प्राप्त है। #अंग्रेज चले गये पर अपनी #अंग्रेजी छोड़ गये और भारतीयों पर इस कदर हावी है कि इसके आगे अपनी भाषा हिन्दी के प्रति रुझान नहीं,,,गर्व नहीं। मुझे तो आशंका है,,,जब स्वतन्त्रता के बाद भरत में अंग्रेजी ने इतनी जल्दी लोगों पर कब्जा जमा लिया है तब अगले 50 वर्षों में हिन्दी की स्थिति क्या होगी!!??
स्वरचित
अनिता निधि
जमशेदपुर, झारखंड
🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀
द्वितीय स्थान
नमन मंच
#महाराष्ट्र क़लम के सुगंध
विषय ....हिन्दी दिवस
14-09-20 सोमवार
स्वाभिमान मेरी हिन्दी भाषा ,
अभिमान मुझे हिन्दी माँ का ।
आँचल भाषायें पुष्पमयी ,
पर हार सूत्र हिन्दी भाषा ।
रस अलंकार से शोभित है ,
माँ भारत भाल सजी हिन्दी ।
कवि उद्यानों में महक रही,
सुरभित साहित्य करे हिन्दी ।
सूर - भक्ति सरोवर में डूबी ,
तुलसी मर्यादित ओढ़े चुनरी ।
रसखान पगी मीठी भाषा,
मीरा के अधरन की हिन्दी ।
भारत के भाल पर चन्दन है ,
भारत माँ रूप में कंचन सी ।
संस्कारी संस्कृति रूपवान ,
मर्मस्पर्शी संबोधित हिन्दी ।
मस्तक पर बिन्दी सजती है ,
पर रुदन क्यों करती है हिन्दी ।
क्यों असहाय है हिन्दी आज बनी,
क्यों मोहताज है नारे की हिन्दी ।
संरचित .....सुधा चतुर्वेदी मधुर
.मुंबई
द्वितीय स्थान
नमन मंच
महाराष्ट्र कलम की सुगन्ध
दिनाँक-१४/०९/२०२०
विषय-हिंदी दिवस
विधा-कविता
-----------
हिंदी दिवस निर्धारित किया,
देकर राजभाषा का मान,
लिपि हो जिसकी देवनागरी,
उसी का हो सम्मान।।
हो उद्देश्य सफल हमारा,
करें प्रतिवर्ष यही संकल्प,
अंग्रेजी जैसी सह भाषा भी,
न हो हिंदी का विकल्प।।
मूल भावार्थ समाहित जिसमें,
नही दोगलापन लिये,
जैसा बोले वैसा लिख रहे,
नही पश्चिमी ढंग लिये।।
जनमानस की भाषा हिंदी,
सरस मधुर मनभावन है,
फिर क्यों अंग्रेजी की लूट मची,
हिंदी तो नेह सरसावन है।।
हिंदी पखवाड़े को हम मनाएं,
रचकर सारे विधान,
जन जन को जाग्रत करते,
बढ़ा हिंदी का रुझान।।
सर्वश्रेष्ठ विकसित संस्कृति का ,
है इसमें गुणगान,
तभी पश्चिमी देशों से आते,
शिक्षार्थी लेने ज्ञान।।
हिंदी दिवस पर प्रण करें,
हिंदी हो इकलौता नाम,
युगल विकल्प कुछ नही,
एकल भाषा में हो काम।।
-----
सविता परमार
मध्यप्रदेश
🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 तृतीय स्थान
नमन करता हूं सभी हिंदी साहित्य के प्रेमियों को
🙏🙏🙏🙏
"हिंदी हमारी भाषा ही नहीं बल्कि हमारी पहचान है, हमारी विरासत है इस विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हमें सदैव तत्पर रहना चाहिए "
अभिषेक मिश्रा
#हिंदी दिवस विशेष २०२०
हिंदी भारत में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है।
और इसे राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया था। हिंदी के महत्व को बताने और इसके प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए पहल की थी। गांधी जी ने हिंदी को जनमानस की भाषा भी बताया था।
इस पर साल 1949 में स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जिसे भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में बताया गया है कि राष्ट्र की राज भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। क्योंकि यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था। इसी वजह से इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया।
लेकिन जब राजभाषा के रूप में हिंदी को चुना गया और तो गैर हिन्दी भाषी राज्य खासकर दक्षिण भारत के लोगों ने इसका विरोध किया फलस्वरुप अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा।
लेकिन आज के समय में हिंदी भाषा लोगों के बीच से कहीं-न-कहीं गायब होती जा रही है लोग अंग्रेजी बोलने में अपने आप को आधुनिक समझने की भूल करते है
जबकि हिंदी में लिखे गए साहित्य हमें जीने का रास्ता दिखाते है।
ये सत्य है इंग्लिश ने अपना प्रभुत्व जमाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है यदि हालात यही रहे तो वो दिन दूर नहीं जब हिंदी भाषा हमारे बीच से गायब हो जाएगी लेकिन आज। का सबसे बड़ा संचार का माध्यम हिन्दी ही एक ऐसी भाषा है जिसे जस का तस पढ़ा और बोला जाता है।
हमें यदि हिंदी भाषा को संजोए रखना है तो इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ाना होगा। ज्यादा से ज्यादा लोगों को हिंदी साहित्य कि जानकारी और
सरकारी कामकाज में हिंदी को प्राथमिकता देनी होगी।
आज के युवाओं द्वारा ये प्रयत्न हो रहा है कि हमारी हिन्दी भाषा ने विश्व पटल पर सोशल मीडिया से लेकर इंटरनेट के माध्यम से एक अमिट छाप छोड़ी है।
अंत में ये कहना कोई अनुचित नहीं होगा कि वास्तव में यदि हम अपना और अपने देश समाज का विकास, उत्थान चाहते है तो सबसे पहले ये स्वीकार करना अति आवश्यक होगा कि भाषा का विकास सबसे पहले जरूरी है।।
मौलिक लेख
अभिषेक मिश्रा
बहराइच
उत्तर प्रदेश
तृतीय स्थान
नमन मंच
दिनांक....१४/०९/२०
गीत...हिंदी की जय होने दो
**********************
कब तक रोकोगे हिंदी को, अब तो जी लेने दो,
ग्रंथों में संजो के रखा, जन-जन का हो लेने दो,
कहाँ व्यास ने जाकर के प्रकाशन करवाया था,
कहां वाल्मीकि ने बोलो रामायण छपवाया था,
बढ़ रहा प्रकाश हिंदी का, अब आंखें खोलो ना,
ग्रंथों में संजो के रखा,जन -जन का हो लेने दो ,
सर्व व्यापक, सरलता, सहज सम्मान पाया है,
राष्ट्रभाषा से एकता का राष्ट्र भाव गहराया है,
हिंदी का मान- सम्मान अब जय गान होने दो,
ग्रंथों में रखा संजो के,जन-जन का हो लेने दो,
निज भाषा,निज बोली पर मन गर्वित हर्षाया है,
कविता,कहानी,लेख,चर्चा अच्छा समय आया है,
हर हाथ लेखनी सजी रहे, प्रसार, प्रचार होने दो
ग्रंथों में संजो के रखा,जन - जन का हो लेने दो ,
संगणक युग आया बदल गई परिभाषाएं है,
नित नव सृजन हो रहा , नई विचारधाराएं है,
तोड़ी सीमाएँ हिन्दी ने, जय जय जय होने दो,
ग्रंथों में संजो के रखा,जन जन का हो लेने दो ...
सामाजिक माध्यम ने आज लोकप्रियता बढ़ाई है,
हिन्दी क्रांती युग की नव झलकियाँ नजर आईं है,
साहित्य की गंगा से मिल ,पावन इसको होने दो,
ग्रंथों में संजो के रखा,जन - जन का हो लेने दो ,
मनीषा सहाय सुमन
स्वरचित
महाराष्ट्र कलम की सुगंध द्वारा आयोजित चित्र आधारित कविता लेखन में उत्कृष्ठ सृजन के लिए आपको ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं। महाराष्ट्र कलम की सुगंध परिवार आपके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता है।
💐💐💐💐💐 अनुराधा चौहान 'सुधी'
सचिव (महाराष्ट्र कलम की सुगंध)
चित्र गूगल से साभार
आयोजन- हिंदी दिवस
विधा- गीत
आधार छंद- सरसी
मात्रा विधान-१६,११=२७ अंत गाल
" हिन्दी भाषा "
हिन्द-देश के वासी हैं हम,हिन्दी अपनी शान।
हिन्दी से ही मान हमारा,हिन्दी ही पहचान।
निज भाषा का करो सदा सब,
नित आदर सत्कार।
रहो सभी से मिलजुल करके,
छोड़ो सब तकरार।
गर्व हमें हिन्दी भाषा पर,हिन्दी अपनी जान।
हिन्दी से ही मान हमारा,हिन्दी ही पहचान।
भटक गए हैं कुछ साथी तो,
उन्हें दिखाओ राह।
ठेस न पहुँचे कभी किसी को,
रखिए ऐसी चाह।
हिन्दी भाषा का सब मिलकर,करिए नित सम्मान।
हिन्दी से ही मान हमारा, हिन्दी ही पहचान।
बातचीत करिए हिन्दी में,
खास रहे या आम।
हिन्दी भाषा में ही हो अब,
सब सरकारी काम।
दर्ज राष्ट्रभाषा के पद पर,करिए सब अभिमान।
हिन्दी से ही मान हमारा, हिन्दी ही पहचान।
हिन्दी है बिन्दी के जैसे,
सदा बढ़ाती साज।
मधुर-मधुर हैं शब्दावलियाँ,
भाषा का है ताज।
लेन-देन हो सब हिन्दी में,रखिए इसका ध्यान।
हिन्दी से ही मान हमारा,हिन्दी ही पहचान।
स्वरचित
रामप्रसाद मीना 'लिल्हारे'
चिखला बालाघाट (म.प्र.)
प्रथम स्थान
नमन मंच--महाराष्ट्र कलम की सुगंध
तिथि--14/09/2020
विषय-- आलेख हिन्दी दिवस
हिन्दी:कल, आज और कल
*********************
हिन्दी हमारी मातृभाषा और हमारी राष्ट्रभाषा है। हमारे राष्ट्र के माथे की बिन्दी है। भाषा संप्रेषण का सशक्त साधन होता है। जीवंतता, स्वायत्तता तथा लचीलापन भाषा के प्रमुख लक्षण हैं। इसलिये देश में हिन्दी बोली जाने के आधार पर 14 सितंबर 1949 को संविधान की भाषा समिति ने हिंदी को राजभाषा पद पर स्वीकृत किया और 1963 में राजभाषा अधिनियम जारी हुआ। यही कारण है कि हम 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस के रुप में मनाते हैं।
साहित्यकारों ने हिन्दी के लिये बहुत कुछ किया।हिन्दी को अपनी लेखनी और साहित्य से समृद्ध किया है। आधुनिक हिन्दी के जनक कहे जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद ने कहा था अपनी भाषा की उन्नति में ही अपनी उन्नति है। आगे महावीर प्रसाद द्विवेदी,माखनलाल चतुर्वेदी,हज़ारी प्रसाद द्विवेदी,प्रेमचंद,निराला,पन्त,महादेवी वर्मा, बच्चन आदि ने हिन्दी को खूब समृद्ध किया है। आज भी हिन्दी में बहुत कुछ लिखा जा रहा है,,,पर हिन्दी भाषा के साथ एक बड़ी बिडंबना है। विश्व में ७० करोड़ लोग हिंदी भाषी हैं और यह तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। लेकिन हिंदी प्रचार प्रसार के लिए सरकार द्वारा जो समुचित कदम उठाये जाने चाहिये थे वो उन्होंने नहीं किया। भले ही विश्व के विश्व विद्यालयों में हिंदी अध्यापन हो रहा है परंतु विडंबना यह है कि हिंदी भाषा अपने ही घर में उपेक्षित ज़िन्दगी जी रही है। यहाँ गुड मॉर्निंग से सूर्योदय और गुडनाइट से सूर्यास्त होता है। हैप्पी बर्थ डे से जन्म और आर आई पी से मरण संदेश भेजे जाते हैं। सच पूछा जाये तो अंग्रेजी बोलने वाले को बुद्धिमान और हिंदी बोलने वालों को समाज में हेय दृष्टि से नहीं देखा जाता है। जब भी हिंदी दिवस आता है हम हिंदी पखवाड़ा मना कर "हिंदी मेरी शान हिंदी मेरी जान "बोल कर अपने कर्तव्य को पूरा कर लेते है। माता-पिता भी कम दोषी नहीं, जब वे अपने बच्चों को बोलना सिखाते हैं तब अपने बच्चे के आगे अंग्रेज़ी परोसने लगते हैं। हिंदी की दशा हमारी दोहरी नीति की शिकार हो गई है।
हिंदी को कभी सर्वश्रेष्ठ भाषा का दर्जा प्राप्त था। आज उसकी ऐसी दुर्दशा जिसे लोग बोलने में ,संदेश भेजने में शर्म का अनुभव करते हैं। अंग्रेज़ी में संवाद लिख या बोल कर अपने को संभ्रांत महसूस करते हैं। हिंदी और अंग्रेज़ी मिश्रित भाषा का प्रचलन (हिंगलिश) शहरों में तो आम बात है, अब तो गाँव में भी देखने, सुनने को मिलने लगा है।
हिंदी की दुर्दशा का आकलन तो इसी बात से लगाया जा सकता कि इंग्लिश मिडियम स्कूलों में हिंदी का आस्तित्व बचाने के लिए अनिवार्य विषय के रुप में पढ़ाने के लिए सरकार को प्रयास करने पड़ रहे हैं। विदेशी भाषा के ज़ंजीर से जकड़ी हिंदी को दोयम का दर्जा प्राप्त है। #अंग्रेज चले गये पर अपनी #अंग्रेजी छोड़ गये और भारतीयों पर इस कदर हावी है कि इसके आगे अपनी भाषा हिन्दी के प्रति रुझान नहीं,,,गर्व नहीं। मुझे तो आशंका है,,,जब स्वतन्त्रता के बाद भरत में अंग्रेजी ने इतनी जल्दी लोगों पर कब्जा जमा लिया है तब अगले 50 वर्षों में हिन्दी की स्थिति क्या होगी!!??
स्वरचित
अनिता निधि
जमशेदपुर, झारखंड
🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀
द्वितीय स्थान
नमन मंच
#महाराष्ट्र क़लम के सुगंध
विषय ....हिन्दी दिवस
14-09-20 सोमवार
स्वाभिमान मेरी हिन्दी भाषा ,
अभिमान मुझे हिन्दी माँ का ।
आँचल भाषायें पुष्पमयी ,
पर हार सूत्र हिन्दी भाषा ।
रस अलंकार से शोभित है ,
माँ भारत भाल सजी हिन्दी ।
कवि उद्यानों में महक रही,
सुरभित साहित्य करे हिन्दी ।
सूर - भक्ति सरोवर में डूबी ,
तुलसी मर्यादित ओढ़े चुनरी ।
रसखान पगी मीठी भाषा,
मीरा के अधरन की हिन्दी ।
भारत के भाल पर चन्दन है ,
भारत माँ रूप में कंचन सी ।
संस्कारी संस्कृति रूपवान ,
मर्मस्पर्शी संबोधित हिन्दी ।
मस्तक पर बिन्दी सजती है ,
पर रुदन क्यों करती है हिन्दी ।
क्यों असहाय है हिन्दी आज बनी,
क्यों मोहताज है नारे की हिन्दी ।
संरचित .....सुधा चतुर्वेदी मधुर
.मुंबई
द्वितीय स्थान
नमन मंच
महाराष्ट्र कलम की सुगन्ध
दिनाँक-१४/०९/२०२०
विषय-हिंदी दिवस
विधा-कविता
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हिंदी दिवस निर्धारित किया,
देकर राजभाषा का मान,
लिपि हो जिसकी देवनागरी,
उसी का हो सम्मान।।
हो उद्देश्य सफल हमारा,
करें प्रतिवर्ष यही संकल्प,
अंग्रेजी जैसी सह भाषा भी,
न हो हिंदी का विकल्प।।
मूल भावार्थ समाहित जिसमें,
नही दोगलापन लिये,
जैसा बोले वैसा लिख रहे,
नही पश्चिमी ढंग लिये।।
जनमानस की भाषा हिंदी,
सरस मधुर मनभावन है,
फिर क्यों अंग्रेजी की लूट मची,
हिंदी तो नेह सरसावन है।।
हिंदी पखवाड़े को हम मनाएं,
रचकर सारे विधान,
जन जन को जाग्रत करते,
बढ़ा हिंदी का रुझान।।
सर्वश्रेष्ठ विकसित संस्कृति का ,
है इसमें गुणगान,
तभी पश्चिमी देशों से आते,
शिक्षार्थी लेने ज्ञान।।
हिंदी दिवस पर प्रण करें,
हिंदी हो इकलौता नाम,
युगल विकल्प कुछ नही,
एकल भाषा में हो काम।।
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सविता परमार
मध्यप्रदेश
🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 तृतीय स्थान
नमन करता हूं सभी हिंदी साहित्य के प्रेमियों को
🙏🙏🙏🙏
"हिंदी हमारी भाषा ही नहीं बल्कि हमारी पहचान है, हमारी विरासत है इस विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हमें सदैव तत्पर रहना चाहिए "
अभिषेक मिश्रा
#हिंदी दिवस विशेष २०२०
हिंदी भारत में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है।
और इसे राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया था। हिंदी के महत्व को बताने और इसके प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए पहल की थी। गांधी जी ने हिंदी को जनमानस की भाषा भी बताया था।
इस पर साल 1949 में स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जिसे भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में बताया गया है कि राष्ट्र की राज भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। क्योंकि यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था। इसी वजह से इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया।
लेकिन जब राजभाषा के रूप में हिंदी को चुना गया और तो गैर हिन्दी भाषी राज्य खासकर दक्षिण भारत के लोगों ने इसका विरोध किया फलस्वरुप अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा।
लेकिन आज के समय में हिंदी भाषा लोगों के बीच से कहीं-न-कहीं गायब होती जा रही है लोग अंग्रेजी बोलने में अपने आप को आधुनिक समझने की भूल करते है
जबकि हिंदी में लिखे गए साहित्य हमें जीने का रास्ता दिखाते है।
ये सत्य है इंग्लिश ने अपना प्रभुत्व जमाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है यदि हालात यही रहे तो वो दिन दूर नहीं जब हिंदी भाषा हमारे बीच से गायब हो जाएगी लेकिन आज। का सबसे बड़ा संचार का माध्यम हिन्दी ही एक ऐसी भाषा है जिसे जस का तस पढ़ा और बोला जाता है।
हमें यदि हिंदी भाषा को संजोए रखना है तो इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ाना होगा। ज्यादा से ज्यादा लोगों को हिंदी साहित्य कि जानकारी और
सरकारी कामकाज में हिंदी को प्राथमिकता देनी होगी।
आज के युवाओं द्वारा ये प्रयत्न हो रहा है कि हमारी हिन्दी भाषा ने विश्व पटल पर सोशल मीडिया से लेकर इंटरनेट के माध्यम से एक अमिट छाप छोड़ी है।
अंत में ये कहना कोई अनुचित नहीं होगा कि वास्तव में यदि हम अपना और अपने देश समाज का विकास, उत्थान चाहते है तो सबसे पहले ये स्वीकार करना अति आवश्यक होगा कि भाषा का विकास सबसे पहले जरूरी है।।
मौलिक लेख
अभिषेक मिश्रा
बहराइच
उत्तर प्रदेश
तृतीय स्थान
नमन मंच
दिनांक....१४/०९/२०
गीत...हिंदी की जय होने दो
**********************
कब तक रोकोगे हिंदी को, अब तो जी लेने दो,
ग्रंथों में संजो के रखा, जन-जन का हो लेने दो,
कहाँ व्यास ने जाकर के प्रकाशन करवाया था,
कहां वाल्मीकि ने बोलो रामायण छपवाया था,
बढ़ रहा प्रकाश हिंदी का, अब आंखें खोलो ना,
ग्रंथों में संजो के रखा,जन -जन का हो लेने दो ,
सर्व व्यापक, सरलता, सहज सम्मान पाया है,
राष्ट्रभाषा से एकता का राष्ट्र भाव गहराया है,
हिंदी का मान- सम्मान अब जय गान होने दो,
ग्रंथों में रखा संजो के,जन-जन का हो लेने दो,
निज भाषा,निज बोली पर मन गर्वित हर्षाया है,
कविता,कहानी,लेख,चर्चा अच्छा समय आया है,
हर हाथ लेखनी सजी रहे, प्रसार, प्रचार होने दो
ग्रंथों में संजो के रखा,जन - जन का हो लेने दो ,
संगणक युग आया बदल गई परिभाषाएं है,
नित नव सृजन हो रहा , नई विचारधाराएं है,
तोड़ी सीमाएँ हिन्दी ने, जय जय जय होने दो,
ग्रंथों में संजो के रखा,जन जन का हो लेने दो ...
सामाजिक माध्यम ने आज लोकप्रियता बढ़ाई है,
हिन्दी क्रांती युग की नव झलकियाँ नजर आईं है,
साहित्य की गंगा से मिल ,पावन इसको होने दो,
ग्रंथों में संजो के रखा,जन - जन का हो लेने दो ,
मनीषा सहाय सुमन
स्वरचित
महाराष्ट्र कलम की सुगंध द्वारा आयोजित चित्र आधारित कविता लेखन में उत्कृष्ठ सृजन के लिए आपको ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं। महाराष्ट्र कलम की सुगंध परिवार आपके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता है।
💐💐💐💐💐 अनुराधा चौहान 'सुधी'
सचिव (महाराष्ट्र कलम की सुगंध)
चित्र गूगल से साभार

शानदार रचनाएँ 👌👌👌 सभी चयनित रचनाकारों को बधाई 💐💐💐
ReplyDeleteचयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐💐
ReplyDeleteसभी चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें👏👏👏👏👏👏👌👌👌👌👌👌
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