Wednesday, September 9, 2020

पाती/पत्र


प्रथम स्थान
चित्रलेखन प्रतियोगिता
विषय: "पाती"
रचना: स्वरचित

सफ़ेद बाल, झुर्रियों से भरे हाथ,
धुंधलाई आँखे, मुँह में ना दाँत,
कुछ ऐसे अपने यौवन का
बखान लिख रही हूँ,
बरसों बाद तुम्हारी तरफ़ से
एक 'पाती' अपने नाम लिख रही हूँ।।

लिख रही हूँ वो जो तुम कहते कि
मैं किसी फिल्मी नायिका से कम नहीं,
और नज़र लगे मुझे ज़माने की
इतना इस ज़माने में दम नहीं,
फिर क्यों आज दर्पण में
अबला सी दिख रही हूँ,
एक 'पाती'...

बरसों बीत गए तुम बिन जीते हुए
जी रही हूँ किसी तरह ख़ुद को समेटे हुए,
ना कोई खाना पूछता है, ना ही पानी
क्यों होती है लाचार बूढों की ज़िंदगानी,
सच तो ये है कि रोज मैं
मर मर के जी रही हूँ,
एक 'पाती'......


- डॉ. निशीथ चन्द्र

द्वितीय स्थान

एक सकारात्मक पत्र
स्वयं के पुत्र को
संवेदनशील माँ का
वृद्दाश्रम से.......!!
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यूँ तो मैं ले लेती हूँ अकेले ही यहाँ सांस
पर क्या सकून मिलता काश! मुझे
कि कोई अपना होता पास!

वैसे मैं खा पी ले रही हूँ आराम से
तुम फिक्र मत करना
कोई दिक्कत नहीं है यहाँ खास!

मुझे तो आदत है बचपन से अभाव
में जीने की इस लिए आ जायेगा
मुझे धीरे धीरे रास!

पर मुझे तो एक खौंफ खाये जा रहा है
इस बात का
ईश्वर न करे कभी यदि मजबुर हुए तो तुम
तो कैसे कर पाओगे यहाँ निवास !

अधूरे मे एक ओर डर सताये जा रहा है
मुझे रात भर
बैचेन रहती हूँ आठों प्रहर
और हो जाती हूँ कभी कभी मैं उदास !
ये सोच सोच के कि
जब तुम लोक लाज से बहाओंगे आँसू
जब आश्रम के प्रांगण मे
पडी होगी मेरी लाश!

लोग क्या कहेंगे मेरे बेटे को?
कहीं कोई ताना तो
न मार देगा मेरे पोते को?
कोई भला बुरा तो न कह देगा मेरे
परिवार को?!
ऐसा सोच सोच के मैं हो जाती हूँ
हताश!

खाया पिया तन को लगता ही नहीं
इन्हीं बातों की फिक्र है मुझे
और हो जाती बहूत बार मैं निराश!

सब बातों को भूलने का मैंने बहुत
किया प्रयास
पर तुझे तो मालूम ही है
तेरी माँ का साफ्ट वेयर
है ही कुछ ऐसा खास!!
तुम अटके रहोगे मेर मन मस्तिष्क में
जब तक सांसों में उच्छ्वास !!

            By Ashok doshi
            Secunderabad
                7331109258
तृतीय स्थान
नमन मंच
दिनांक-9/9/20
विषय-पत्र
................
होकर व्यथिति
आहत मन से
ले कलम
उकेरती कागज पर
मन के उदगारों का प्रवाह
जो बह रहा था जाने कब से
नही कोई अपना रहा खाश
जिससे कर ले मन की बात
साथी भी कब का छोड़ गया
अरमानो को धो गया
समझा था जिसको लाठी
वो गया कमाने है थाती
चाहत इतनी बढ़ गई
उजली दुनिया खो गया
शायद उसको कुछ याद नही
है नदी पार मेरा गाँव
जहां रहती मेरी छाव
था खून पिला कर बड़ा किया
सपनो का एक नाम दिया
जो तरस रही एक आभा को
बुझती सांसो के तारों संग
लिख रही पत्र
एक आशा से
बेनाम पते के नाम से
ओ जा मेरे लाल प्रिये
बहते अश्को को नाम मिले

स्वरचित
मीना तिवारी

तृतीय स्थान
नमन मंच
महाराष्ट्र कलम की सुगन्ध
विषय-चित्रलेखन
शीर्षक-पाती
विधा-मुक्तक
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सहेजती यादों को तेरी
पाती लिखती कलम मेरी
नही आता है तू लेकिन
स्पर्श को लिखती कलम मेरी।

आश्रम मेरा बना आशियाँ
घर आँगन ओर ये गलियां
अब यही ठिकाना है मेरा
नदारद यहां से मेरी कलियाँ ।

खत तेरा क्यों नही मिलता
प्रतिउत्तर को मन मचलता
राह ताकती दिन और रात
फिर भी डाकिया नही दिखता।

जब तुझे मेरी यह पूंजी मिले
अनकहे भावों की अनुभूति मिले
तब भावों में न हो जाना गुम
हर शब्द से खिल रहे हैं गुल।

नित नित तेरी राह निहारूँ
इंतजार तेरा पाती पर उतारूँ
बेबस मन को ढांढस बंधाकर
शब्दो को अश्रु स्नान कराऊँ।

पानी से भीगे इन भावो को
समझ लेना मन के घावों को
होगी बहुत देर तब तक बेटा
मिलेगी पाती जब तक बेटा।
-------
सविता परमार
मध्यप्रदेश

महाराष्ट्र कलम की सुगंध द्वारा आयोजित चित्र आधारित कविता लेखन में उत्कृष्ठ सृजन के लिए आपको ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं। महाराष्ट्र कलम की सुगंध परिवार आपके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता है।

अनुराधा चौहान 'सुधी'
सचिव (महाराष्ट्र कलम की सुगंध)

चित्र लेखन से साभार

6 comments:

  1. चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐💐💐💐

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    Replies
    1. जी बहुत बहुत धन्यवाद 💐💐

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  2. सुंदर प्रस्तुति 👌👌👌
    सभी चयनित रचनाकारों को ढेर सारी बधाई

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    Replies
    1. जी बहुत बहुत धन्यवाद 💐💐

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  3. सभी चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें👏👏👏👏💐💐💐💐💐💐

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    1. जी बहुत बहुत धन्यवाद 💐💐

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पिता

  प्रथम स्थान नमन महाराष्ट्र क़लम की सुगंध मंच दिनांक - १६/१०/२०२० दिन - शुक्रवार विषय - पिता --------------------------------------------- ...