Saturday, September 12, 2020

चित्र लेखन


11/9/20
प्रथम स्थान
नमन
चित्र लेखन

जो कली अभी खिली नहीं ,
न  पराग न  मधु मास  है ।
बचपन की वो देहलीज पर ,
ना युवा न  अभी विकास है ।

       करके बालिका विवाह ,
       उसके साथ ये अन्याय है।
       दी हाथ में है गुड़िया उसे ,
          समझा उसे नादान है।

कब तक चलेगी  रीत ये ,
बालिका वधू विवाह की ।
इसमें सभी का पाप है ,
अन्याय है अतिकार है ।

          क्यों बोझ मानते उसे ,
           वो प्रीत की रस धार है ॥
           माँ का  कलेजा मान है ,
           पिता को वरद हाथ है ।

उसकी उमर ना विवाह की ,
कच्ची कली , ना पुष्प है ।
उसको दिया भँवर जाल में ,
तो किसका ये अपराध है ।

स्वरचित    सुधा चतुर्वेदी   मुंबई

प्रथम स्थान

११/९२०२०
शुक्रवार
नमन मंच
महाराष्ट्र कलम की सुगंध
विषय- चित्रलेखन
विधा-कविता
-        -        -        -        -
           * बाल विवाह *
 अरे! नाचती है रक्त में,क्रोधित
    उदधि की लोल लहरें।
 कांपती है व्याकुल नजरें,मासूम
    खेलतीअभी घरआँगन में।
 नहीं देख सकती नजरें बच्ची
          को विदा होते।
   उठी भयंकर कलुष पीढ़ा
       अन्तर्मन में शूल से।
 छोटी सी बाला का अभी क्यों
         क्यों , ब्याह किया।
  हुआ ये जघंन्यअपराध ,ऐसा
          बोलो क्यों किया।
 अभी तोखुद ही गुड़िया मासूम,
        गुड़िया संग खेलती।
 लड़की अभी सयानी नहीं,जन्म
     लेते ही पराई जानी गई।
 और इतनी ही जल्दी विदा की
         घड़ी भी आ गई।
   बच्ची है गाय नहीं,जो पराये
      खूटे में बांध दी गई।
  अरे बांध दिया निर्दयता से क्या
        तुम्हें बोध नहीं। 
  ये ब्याह नहीं अपराध किया,
      अन्याय है,धर्म नहीं।
 नादान है जिसे जिम्मेदारी की
     अभी भनक भी नहीं।
 जीते जी मार दिया,सजा दिया
      इसकी, अभी सेअर्थी।
               * * *
*"नीलम पटेल" *प्रयागराज *

(स्वरचित,मौलिक, अप्रकाशित रचना)


द्वितीय स्थान
नमन मंच
महाराष्ट्र कलम की सुगन्ध
दिनाँक-११/०९/२०२०
विषय-चित्राधारित
विधा-मुक्तक
---------

अभी अभी तो आँगन में आयी
नही पायी अभी तो तरूणायी
फिर क्यों मुझे पराया करते
अभी तो फैलानी है रोशनायी।

माटी से बने खिलाने मेरे
रखे आँगन के कोने में तेरे
नही फेकना बाबुल उनको
वो ही रहेंगे मेरे चितेरे।

दादी माँ की सीखें है न्यारी
क्यों? बनाई ये चुनर प्यारी
गुड्डे संग क्यों घर है बदला
नहीं रही अब तुमको प्यारी।

आँगन में झूला है मेरा
सखियों संग डाला है घेरा
कौन है जो पेंग लगाये
मेरा नही वहाँ अब है डेरा।

कब तक रहूंगी मैं पराई
क्यों बन्द है मेरी पढ़ाई
इतना कर श्रृंगार मुझे
क्यों ये चूड़ियां पहनाई।

समाज के बंधन में बंधकर
किया बाल विवाह सीखों को सुनकर
बेटी सदा रही है पराया धन
दी बिदाई हृदय पर पाथर रखकर।
-----/-----
सविता परमार
मध्यप्रदेश

तृतीय स्थान
नमन मंच महाराष्ट्र की सुगंध
विषय- चित्र लेखन
विधा-कविता
दिनांक 11-9-2020

अपराध कियाऔर उसको,
 संस्कार कह दिया|
जालिम रुढियों ने,
जाने कितने ही सितम किया|
वो बाप का दिल माँ का दिल भी,
 कितना क्रूर था|
जोअपनी बेटी को ,
रिवाजों की भेंट कर दिया|
बेटी से बढ़कर रिवाजों,
की फिक्र रहती थी|
रिवाजों के डर से ,
ये संस्कार कर दिया|
बाल विवाह जैसा पाप ,
करते वो भगवान को भी न डरे|
ईश्वर न करेगा मांफ,
सोचना ही छोड़ दिया|
गुड़िया को सजा करके,
 समाज ने|
उसे भी बेजबान खिलौना,
 बना दिया|
कैसे कैसे सितम देखिए,
समाज ने किये|
और उसे संस्कार,
नाम दे दिया|
स्वरचित
 सर्वाधिकार सुरक्षित
 विजय श्रीवास्तव
बस्ती
दिनांक11-9-2020

महाराष्ट्र कलम की सुगंध द्वारा आयोजित चित्र आधारित कविता लेखन में उत्कृष्ठ सृजन के लिए आपको ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं। महाराष्ट्र कलम की सुगंध परिवार आपके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता है।

अनुराधा चौहान 'सुधी'
सचिव (महाराष्ट्र कलम की सुगंध)

चित्र गूगल से साभार

5 comments:

  1. बहुत ही सुंदर 👌👌👌👌
    लाजवाब रचनाएँ 💐💐💐💐

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  2. चयनित रचनाकारों को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं 💐💐💐💐

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  3. मेरी रचना को सम्मानित करने के लिए मंच"महाराष्ट्र कलम की सुगंध"का तहे दिल से आभार, सधन्यवाद💐💐💐💐

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  4. मेरी रचना को सम्मानित करने के लिए मंच"महाराष्ट्र कलम की सुगंध"का तहे दिल से आभार, सधन्यवाद💐💐💐💐

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  5. मेरी रचना को सम्मानित करने के लिए मंच"महाराष्ट्र कलम की सुगंध"का तहे दिल से आभार, सधन्यवाद💐💐💐💐

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पिता

  प्रथम स्थान नमन महाराष्ट्र क़लम की सुगंध मंच दिनांक - १६/१०/२०२० दिन - शुक्रवार विषय - पिता --------------------------------------------- ...