Sunday, September 13, 2020

चित्र लेखन

12-09-20 
प्रथम स्थान
नमन मंच 🙏
#महाराष्ट्र_क़लम_के_सुगंध
आधारित चित्र
         .#जीवन_चक्र
शनिवार

ये जीवन का चक्र है मानव ,
   ये दिन चार बसेरा है ।
      दुनियाँ नश्वर रूप है मानव !
          क्या तेरा क्या मेरा है ?
               जो भी आया उसको जाना ,
           जन्म -मृत्यु का नियम यही ।
          न सुत पत्नी ना कोई प्रेमी ,
         विधि विधना की नियति यही ।
 हर पल क्षण ये आयु जा रही ,
   इसका तुझको ज्ञान नहीं ।
     जैसा कर्म वही फल भोगे ,
        तू नहीं  रखता ध्यान कभी ।
               जान अरे जीवन निस्सार है ,
             स्वर सांसो की बीणा है ।
            पंच तत्व से निर्मित तन ये ,
          सत्संगी बन जीना है ।
ये दुनियां सुन्दर रंगमंच ,
  सब पात्र  निभाते अभिनय हैं ।
     कोई हास्य पात्र कोई रौद्र रूप ,
        वीभत्स रूप के चेहरे हैं ।
                 कंचन काया मत उलझाए ,
              तू विषयों की बेल में ।
            कोई मधुर साथ न जाये ,
         क्यों उलझा मिथ्या खेल में ?
सांसारिक माया विचित्र पहेली ,
   नाते रिश्तों का फेरा है।
      जीवन में मेले बहुत जुड़े ,
         पर उड़ता हंस अकेला है।

स्वरचित      सुधा चतुर्वेदी मधुर
                       मुंबई

द्वितीय स्थान
नमन मंच

अवसाद के घेरे में
दुविधाओं के भंवर में
बैठ कर सोचता
विचारो की वसीयते
पोटली को थाम कर
बढ़ रही व्यग्रता
अन्तहीत द्वंदता
राह का पता नही
भवर में झूमता
दिख रही शून्यता
रहस्यों में उलझ रहा
भ्रमित जीवन सार ले
कुचक्र काल गति में
घूमता घूमता
फस गया जाल में
दुविधा की जिंदगी से
हे प्रभू
उबार दे
मार्ग को प्रशस्त कर
थक गया मैं
लथपथ
थक कर
खामोशियो में
बहकर


स्वरचित
मीना तिवारी

तृतीय स्थान
नमन मंच महाराष्ट्र कलम की सुगंध
विषय-चित्र लेखन
विधा-कविता
दिनांक 12-9-2020

बाबुल के घर से आई आत्मा,
फिर वापस वहीं पे जाना है|
ये दुनिया ससुराल हमारी,
चार दिनों का ठिकाना है|
ये रहस्यमय सन्नाटे ,
बस उनको ही डराते हैं|
जो दुनिया की माया में,
 खोकर उसे भुलाते हैं|
 तू कबीर को पढ़ले प्यारे,
 तू मोक्ष को पा जायेगा|
वैतरणी तू पार करेगा,
 कोई तुझे रोक नहीं पायेगा|
दास कबीर ने ये कहा है|
इसे याद तू कर ले|
 इसको करने की विधि ठीक समझ ले----
तन थिर मन थिर वचन थिर|
सुरति निरति थिर होय|
कह कबीर ता कलप को|
कलप न पावै कोय|
और-----------------
तुलसी दास जी ने ,
श्री राम चरित मानस में कहा है|
उसे हृदय में रख ले|
कलियुग में बस नाम अधारा|
सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा|
जीवन भर सत्कर्म कर|
जीवन भर दिल से जप राम|
इस सुरंग से डर नहीं,
तेरे मालिक राम|
दास कबीर को याद कर|
और भज राम का नाम
राम नाम रस भीनी रे चदरिया,
झीनी रे बीनी| -----------
दास कबीर ने ऐसी ओढ़ी,
जस की तस्वीर धर दीनी चदरिया,
झीनी रे बीनी|
दास कबीर की तरह यदि,
तू करेगा सारे जीवन के काम|
दास कबीर की तरह ही,
यदि भजेगा  राम का नाम|
तो ये सुरंग निश्चित तू पार करेगा|
भव सागर सातों के सातों पार करेगा|
और मोक्ष पायेगा |
भव बाधा से मुक्ति पायेगा|

स्वरचित
 सर्वाधिकार सुरक्षित
 विजयश्रीवास्तव
बस्ती
दिनांक-12-9-2020

महाराष्ट्र कलम की सुगंध द्वारा आयोजित चित्र आधारित कविता लेखन में उत्कृष्ठ सृजन के लिए आपको ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं। महाराष्ट्र कलम की सुगंध परिवार आपके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता है।

अनुराधा चौहान 'सुधी'
सचिव (महाराष्ट्र कलम की सुगंध)

चित्र गूगल से साभार

1 comment:

  1. चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई 💐💐💐💐

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