07/09/2020
प्रथम
निहारती झरोखे से ,
सुन्दर शोभित है एक नारी ।
नख सिख से श्रृंगार करे ,
चमके अद्भूद आभा वाली ।
गहने पहने शोभित लगती ,
राजघराने की नारी ।
लगता ऐसा परसों की कह ,
बरसों नहीं आये हितकारी ।
बाट निहारे मुस्काये मंद ,
जैसे नभ से नव परि प्यारी ।
नयनन में एक आस बसे ,
स्वाति नक्षत्र चातक आदी ।
प्रीतम के स्वागत को आतुर ,
जल बिन मीन भई व्याधी ।
मिलन की आशा हृदय लगाये ,
तपन धरा तरसे पानी ।
स्वरचित सुधा चतुर्वेदी
मुंबई
द्वितीय
नाक में नथ कंठ हासली कमर कंदोरा
पाँव नूपुर झंकार
माथे पर मेमद ,कर रची मेहंदी
सिंदूरी वर्ण सूरज भाल कपाल!!!
चांदनी रात और उमडता यौवन
क्यों नहीं रहेगीे बेताबी बेसब्री शायद
वो पुछ रही सवाल?
चढ चढ जोवूं डाघले म्हारा कद
आवेगा भरतार!!!
........
छपर भी पुराना पड गया तीडकन
लाग्या बाँस
घरे पधारो पियू मारा थे पुरी कर
दो आस!!
सर्द हवा व चांदनी रात और उस पर
ये मधूमास
नवरात्री नजदीक है खेलेंगे हम रास !!!
......
अब घर आ जाओ बनासा किस बिध करां
खुल कर मनडे री बात!!!
इशारा जरा समझो मेरा
घर में नणदल सास और आदरणीय दादी सास
जब जागूं जब ऐकली
काली कजरारी रात अमास
नभ में चमके बिजली
मन मारो उदास
जीव झकोला खाय और
अटके मारी साँस
सूनो लागे डागलो सूनो लागे विलास
नेडी नेडी करो नौकरी थे ढोला रहो थे म्हारे पास
...............
रचनाकार
अशोक दोशी
तृतीय
नववधु की प्रतीक्षा
आई पिया मिलन की बेला,
किये गोरी ने सोलह श्रृंगार।
प्रतीक्षारत हैं कजरारे नैना
झांके खिड़की के द्वार।।
दम-दम दमके रूप दामिनी
कुन्तल केश नागिन लहरायें।
मेंहदी रचे हाथों में चुड़ियां
खन-खन कंगना संग खनखनायें।।
घूंघट में है चांद सा मुखड़ा
उठा सकुचाती राह निहारती।
कब आयेंगे बालम मोरे
प्रतीक्षित मन प्रश्न दुहराती।।
***
प्रीति शर्मा "पूर्णिमा"
महाराष्ट्र कलम की सुगंध द्वारा आयोजित चित्र आधारित कविता लेखन में उत्कृष्ठ सृजन के लिए आपको ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं। महाराष्ट्र कलम की सुगंध परिवार आपके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता है।
अनुराधा चौहान 'सुधी'
सचिव (महाराष्ट्र कलम की सुगंध)
चित्र गूगल से साभार
प्रथम
निहारती झरोखे से ,
सुन्दर शोभित है एक नारी ।
नख सिख से श्रृंगार करे ,
चमके अद्भूद आभा वाली ।
गहने पहने शोभित लगती ,
राजघराने की नारी ।
लगता ऐसा परसों की कह ,
बरसों नहीं आये हितकारी ।
बाट निहारे मुस्काये मंद ,
जैसे नभ से नव परि प्यारी ।
नयनन में एक आस बसे ,
स्वाति नक्षत्र चातक आदी ।
प्रीतम के स्वागत को आतुर ,
जल बिन मीन भई व्याधी ।
मिलन की आशा हृदय लगाये ,
तपन धरा तरसे पानी ।
स्वरचित सुधा चतुर्वेदी
मुंबई
द्वितीय
नाक में नथ कंठ हासली कमर कंदोरा
पाँव नूपुर झंकार
माथे पर मेमद ,कर रची मेहंदी
सिंदूरी वर्ण सूरज भाल कपाल!!!
चांदनी रात और उमडता यौवन
क्यों नहीं रहेगीे बेताबी बेसब्री शायद
वो पुछ रही सवाल?
चढ चढ जोवूं डाघले म्हारा कद
आवेगा भरतार!!!
........
छपर भी पुराना पड गया तीडकन
लाग्या बाँस
घरे पधारो पियू मारा थे पुरी कर
दो आस!!
सर्द हवा व चांदनी रात और उस पर
ये मधूमास
नवरात्री नजदीक है खेलेंगे हम रास !!!
......
अब घर आ जाओ बनासा किस बिध करां
खुल कर मनडे री बात!!!
इशारा जरा समझो मेरा
घर में नणदल सास और आदरणीय दादी सास
जब जागूं जब ऐकली
काली कजरारी रात अमास
नभ में चमके बिजली
मन मारो उदास
जीव झकोला खाय और
अटके मारी साँस
सूनो लागे डागलो सूनो लागे विलास
नेडी नेडी करो नौकरी थे ढोला रहो थे म्हारे पास
...............
रचनाकार
अशोक दोशी
तृतीय
नववधु की प्रतीक्षा
आई पिया मिलन की बेला,
किये गोरी ने सोलह श्रृंगार।
प्रतीक्षारत हैं कजरारे नैना
झांके खिड़की के द्वार।।
दम-दम दमके रूप दामिनी
कुन्तल केश नागिन लहरायें।
मेंहदी रचे हाथों में चुड़ियां
खन-खन कंगना संग खनखनायें।।
घूंघट में है चांद सा मुखड़ा
उठा सकुचाती राह निहारती।
कब आयेंगे बालम मोरे
प्रतीक्षित मन प्रश्न दुहराती।।
***
प्रीति शर्मा "पूर्णिमा"
महाराष्ट्र कलम की सुगंध द्वारा आयोजित चित्र आधारित कविता लेखन में उत्कृष्ठ सृजन के लिए आपको ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं। महाराष्ट्र कलम की सुगंध परिवार आपके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता है।
अनुराधा चौहान 'सुधी'
सचिव (महाराष्ट्र कलम की सुगंध)
चित्र गूगल से साभार

सभी विजेता और प्रतिभागियों को ढेर सारी बधाई 💐💐💐
ReplyDeleteसभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐💐
ReplyDeleteचयनित रचनाकारों को ढेरों बधाइयाँ एव शुभकामनाएं ������
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