Tuesday, September 8, 2020

ममता/माँ

8/9/2020
प्रथम स्थान
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गर्भ में उभरते अंकुर को सहेजती
अपने मन के भावो को उकेरती
पीड़ा के चरम तक पहुंचकर वह
स्वर्णिम अनुभूति को जन्म देती।

नन्ही सी जान को वक्ष में समेटती
वात्सल्य की छटा को बिखेरती
भविष्य को अंक में सहेजकर
देख उसमें अपने सपने संजोती।

अभिव्यक्ति का माध्यम बनकर
अतुलनीय ममत्व को लूटाकर
सर्वस्व सदा समर्पण करती
चलती सदा परछाई बनकर।

संस्कारो की जननी बनकर
जीवन का कौशल सिखाकर
भवसागर में तैरना सिखलाती
मुग्धित होती देखकर मुझे इठलाती।

देख मुझे अंतर्मन से पढ़ लेती
दूर रहकर अनहोनी की आहट देती
हर क्षण में तू समाहित है मां
मेरी हर साँस की ख्वाइश है मां।
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सविता परमार
मध्यप्रदेश

द्वितीय स्थान
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ओ माँ
वो तेरे शगुन
की थाली।
वो रिवाजो की
कहानी
तू बहुत याद
आती है।
तू क्या गई।
सब साथ
ले गई।
परीक्षा हो
या नौकरी की
तलाश।
वो तेरा
दही चटाना।
तिलक लगाना
मन्नत के
धागे बाँधना।
मंदिरों के
चक्कर लगाना।
नजर उतारना
कभी कभी
मैं झूठी
बहाने बनाता
सिर दर्द का
अच्छा लगता
तेरा वो
टोटकों का
सिलसिला
बुदबुदाना किसकी
नजर लगी मेरे
लाल को
मालिश करना
तेरी वो सारी
शुभता और ममता
आज भी
मेरे मानस
पटल पर
तेरी अनुपस्थिति
उपस्थित के रूप में
अंकित है।
पर माँ आज
सर दर्द
पर कोई
नजर उतारने
वाला कोई नही
कोई नही कहता
तू थक गया रे
आ थोड़ी देर
के लिए
तुझे सहला दू
काश माँ
तू होती मैं कहता
माँ कुछ देर
के लिए
मुझे अपनी
गोंद में सो जाने दे
थक गया हूं
मैं बहुत....

स्वरचित
मीना तिवारी

तृतीय स्थान
परिवार की नींव माँ ही होती है ,
   उसकी बुनियाद टिकी उस पर ।
      उसकी मेहनत से ही स्तंभ खड़े ,
         घर की आहट उस पर ही कायम ।

           तुम सबको शीतल लगती हो,
              बरगद की छाँव तुम ही तो हो।

 समस्याओं का समाधान करती ,
    माँ चुटकी में सब सुलझाती है ।
      सारे व्यवधानों का ध्यान रखे ,
         घर में सामंजस्य बैठाती है ।

        जगती सागर में नाव डिगी ,
           कश्ती की पतवार तुम ही तो हो।

परिवार का पालन माँ करती है ,
   अपने समीप सब चाहती है ।
      कभी वादे संवादे भी करती,
         अभिव्यक्ति मीठी कर जाती है ।

        सब अर्पण और समर्पण तुम ,
             परिवार के शब्द तुम ही तो हो ।

बच्चों के मन की तुम तरंग ,
  उल्लास उमंग जीवन की हो ।
     गतिशील भरा जीवन तुमसे ,
        सबका स्वाभिमान तुम ही तो हो।

           जीवन में जब रस पान किया ,
              वो अमृत धार तुम ही तो हो।

बच्चों के हृदय की रक्त धार ,
   ऊर्जा गतिवान हुई तुमसे ।
      सब बुद्धि की तुम संचालक ,
           चिन्तन और मनन मिले तुमसे ।

     कोई शब्द लिखे तो कहां तक माँ,
      सब तन मन आधार तुम ही तो हो।

स्वरचित अप्रकाशित मौलिक रचना
     सुधा चतुर्वेदी मधुर
               ..मुंबई

तृतीय स्थान
               मां
उतार लाई स्वर्ग मां तुम,कैसे भुलाएं उपकार तेरा,
जिंदगी देती निज तन से,जीवन समर्पण तुझे मेरा
मां जगत में प्यारी होती,उसकी हो निराली शान,
कोई भी पैदा होता जब,लिखा पढ़ा बनाए महान।

जान लुटा दे पल भर में,नहीं डरे किसी काल से,
हर हाल में प्रसन्न रहती,न झुके जग की चाल से,
ईश्वर से पहले नाम लेते,मां कहाए ममता की मूर्त
बेशक बाप दगा दे जाए,माता नहीं निकलती धूर्त।

बार बार नमन देवी को,एक बार दर्शन दे दो मां,
यही आखिरी विनती हैं,माता करना इंकार तू ना।
जहां रहे सुख से रहाना, कभी मिलने को आएंगे,
धरा सम उपकार तेरे मां,जीवन भर नहीं भूलाएंगे।

तीनों लोकों में नहीं कोई,कर सके मुकाबला आज,
हर बात को सुनकर तुम, मन में रखती बनाए राज,
ब्रह्मा, विष्णु और शिव, कहलाती है तेरे उपकारी,
तेरी छवि अनोखी जग में,हो ममता की मूर्त न्यारी।
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नितांत मौलिक,स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


महाराष्ट्र कलम की सुगंध द्वारा आयोजित चित्र आधारित कविता लेखन में उत्कृष्ठ सृजन के लिए आपको ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं। महाराष्ट्र कलम की सुगंध परिवार आपके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता है।

अनुराधा चौहान 'सुधी'
सचिव (महाराष्ट्र कलम की सुगंध)

5 comments:

  1. चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐💐💐💐

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  2. चयनित रचनाकारों को ढेरों बधाइयाँ एव शुभकामनाएं 💐💐💐

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  3. सभी चयनित रचनाकारों को ढेर सारी बधाई 💐💐💐

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  4. सभी चयनित रचनाकारों को ढेरों बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं 💐💐💐

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पिता

  प्रथम स्थान नमन महाराष्ट्र क़लम की सुगंध मंच दिनांक - १६/१०/२०२० दिन - शुक्रवार विषय - पिता --------------------------------------------- ...