Friday, September 11, 2020

ज़िंदगी के रंग

प्रथम स्थान
विषय; जिंदगी के रंग
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जिंदगी के रंग अनोखे हैं जीवन में
कभी धूप कभी छांव है उपवन में

कभी हर्ष की प्रखर रश्मियाँ
कभी विषाद का तिमिर घना
कभी सावन की मधु फुहारें
कभी पतझर-अभिव्यंजना

कभी स्निग्धता,कभी गर्त दर्पण में
जिंदगी के रंग,अनोखे हैं जीवन में

कभी मधुरिम पुष्प-सुरभि
कभी चरायंध  है प्रतिपल
कभी सफलता कभी हार
प्रयास होते सफल-विफल

कभी स्मिति कभी  उर- कृन्दन में
जिंदगी के रंग अनोखे हैं जीवन में

कभी ऊंचाइयां आस्माँ की
कभी  जलधि सम गहराई
कभी रात्रि का तिमिर घना
कभी है प्रात की तरुणाई

कभी हर्ष कभी अवसाद है मन में
जिंदगी के रंग अनोखे हैं जीवन में

कभी है प्रवेग सरिता सा
कभी ठहराव हर गति में
कभी लाभ है कभी हानि
कभी बाधा  है  प्रगति में

कभी शूल हैं कभी फूल हैं  वन में
जिंदगी के रंग अनोखे हैं जीवन में

कभी सूर्य का ताप प्रखर
कभी तरुवर शीतल छाया
कभी विपन्नता तम उकीर्ण
कभी रहे  असीमित माया

जीवन चलता संकुचन -संवर्धन में
जिंदगी के रंग अनोखे हैं जीवन में

स्व रचित एवं मौलिक

एस पी दीक्षित
उन्नाव, उत्तर प्रदेश

द्वितीय स्थान
नमन मंच
महाराष्ट्र क़लम की सुगंध
विषय .....जीवन के कई रंग
10-09-20 गुरुवार

जीवन शैली इतनी सरल सहज नहीं होती,
जन्म से मृत्यु भिन्न रंग चित्र होती है।
कहीं रंग समता कहीं विषमता का फैला रंग ,
कहीं विश्लेषण कहीं समीक्षा रची होती है।

जीवन के संघर्ष रंग से मन संकुचित मत करना,
संघर्षों के बाद ही जोशीली आंधी उड़ती है ।
देखते हो सागर की खामोशी का हौंसला रंग,
खामोशी कितने तेज ज्वार भाटे ले आती है।

बया का श्रम रंग देखो तिनके बीन लाती है,
तिनके- तिनके से अस्थिर घोंसला बनाती है।
मुंह में दाना भरके बच्चों की परवरिश करती ,
पंखों से कुछ नहीं होता उड़ान रंग दिखाती है ।

ज्ञान के रंग से कालिदास ने महान ग्रंथ लिखे,
इसके बिन तुलसी तुलसीदास न बन पाते थे ।
भक्ति रंग बिन तो वाल्मीकि ना महान होते ,
त्याग रंग बिना राम जी वनवास न जा पाते थे ।

कोई भी राह हो कोई दास्ताँ कैसी हो कभी ,
हमको जिन्दगी रंगो से मार्ग चयन करना होगा ।
प्रतिभा कभी मोहताज नहीं होती किसी हाल में ,
शून्य से हजार तक हमको ही गिनना होगा ।

जिन्दगी इन रंग बिना सार्थक न हो पाती ,
मेहनत संघर्ष त्याग भक्ति ज्ञान रंग ऐसे हैं ।
रंग हैं उम्मीदों के धैर्य विश्वास -आस्था के ,
जिनके बिना जिन्दगी के भाग सब अधूरे हैं ।

स्वरचित सुधा चतुर्वेदी ' मधुर '
    भायन्दर (E) मुंबई

तृतीय स्थान
ये सँसार ......

ये संसार यह जिंदगी के रंग साहित्य संगीत सुर संगत सत्संग और सृष्टी के भिन्न भिन्न सतरंगी शरबती रंग से ही रंगीन है वर्ना यूं देखा जाय तो इस फानी दूनिया में रखा ही क्या है?
वे ही भाग्यवान है जिनके ये संग है!!!
इसलिऐ संगीत व साहित्य को लौकीक जीवन के साथ अलौकिक ऐसे आध्यात्मिक व धार्मिक प्रसंगो व प्रक्रियाओं के साथ भी जोडा गया है ताकी इँसान का जिंदगी के साथ साथ धर्म आध्यात्म में भी जी लगा रहे रस बना रहे
वर्ना जीने का अंतिम शाश्वत सहारा धर्म व धार्मिक क्रियाऐं भी शुष्क लगने लगती है!!

इसलिऐ हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई और तो और वैराग्यमय जैन धर्म में भी संगीत साहित्य और नृत्य द्वारा भग्ती साधना भावना व धर्म प्रभावना होते देखी जा सकती है ।

भारत में लौकिक व्यवहार जैसे शादी सगाई गोद भराई जन्म मूंडन नामकरण यग्योपवीत सँस्कारआदि अवसरों या होली धूलेटी गणगौर व अन्य तीज त्यौहारों में भी गीत संगीत व नृत्य काव्य द्वारा लोकरंजन होता है और उसका शारिरीक स्वस्थता व मानसिक मनोदशा को लेकर महत्व भी होता है!!

और तो और ग्रामिण अंचलो में किसी के अवसान पर रूदन करते हूऐ महिलाओं द्वारा जो वियोग विलाप किये जाते है उन शब्दों को कभी ध्यान से सुने तो उसमें भी आलाप और भरपुर काव्यमय गीत साहित्यसभर शब्द व उनके अर्थ छुपे हुऐ रहते है !!
और उसकी भी ऐक करूण अनुभुती होती है और गीतमय अभिव्यक्ती द्वारा दर्द और गम अवसाद विषाद का निवारण होता है !!!

संगीत व साहित्य अपने आप में एक अनुपम साधना है साधन है जीवन का अभिन्न अंग है वे भाग्यवान है जिनके ये सँग है !
वर्ना तो हम सब को मालूम ही है कि ये दुनिया कितनी बदरंग है !

इस दुनिया में जीना हो तो अन्तरमन में सरलता और स्वभाव में तरलता बनाये सामने वाले के अनुसार ढलने का प्रयास करें और प्यार से अपने पँसद के लोगों से गुफ्तगू करें मिलते रहे हो सके तो राहो में फूल बिछाऐं काँटो से परहेज रखें और प्यार महोब्बत बाँटते रहे! अपने और औरों के गम भी मिटाते रहे!!
एक अच्छा प्रसिद्ध गीत था *"ज्योत से ज्योत जलाते चलो प्रेम की गंगा बनाते चलो*"
जो आपको न भाये उनसे दु:श्मनी नहीं रखें बल्की असहज महसूस करो तो थोडी दूरी बनाऐं रखें!!

शेष तो यह संसार की मायाजाल है जिसमें
कई समस्याओं का सामना करना पडता है!!मसलन:

काम क्रोध मोह मान माया लोभ राग द्वेष क्लेश
आदि कषाय व नाना प्रकार के रोग -शोक आदि से भरी पडी है ये इँसानी जिन्दगीयाँ !!

देखे तो दिल दहल ऊठे दारूण दीनता व अभाव ग्रस्त गृहस्थियाँ!!

आदमी के ही आगे आदमी की पसरती हूई खाली हथेलियाँ!!

नत मस्तक हो के खडा है कहीं इँसान के आगे इँसान फैलाके अपनी झोलीयाँ!

कहीं चल रहे भिषण युद्द और कहीं चल रही है गोलीयाँ !

धर्म क्षैत्र देख कर भी कोई द्वन्द्व में पड जाये वहाँ भावनाऐं नही चलती
चलती है तो केवल बोलियाँ!!!

कहीं बहन दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में है तो भाई करता है अठखेलियाँ!

माँ बाप करते है मेहनत जोड़त पाई पाई और बेटा मनाता रंगरेलियाँ !

जन्मते ही चुप करा दी जाती है कई मासूम बेटीयों को और न सुन पाती है लोरियाँ !!

बहुत बार सोचने पर मजबूर करती है मुझे जीवन की सारी ये अनेक अनुत्तर पहेलियाँ !!


by Ashok doshi 7331109258

महाराष्ट्र कलम की सुगंध द्वारा आयोजित चित्र आधारित कविता लेखन में उत्कृष्ठ सृजन के लिए आपको ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं। महाराष्ट्र कलम की सुगंध परिवार आपके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता है।

अनुराधा चौहान 'सुधी'
सचिव (महाराष्ट्र कलम की सुगंध)

3 comments:

  1. सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई💐💐💐

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  2. सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई💐💐💐

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  3. चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐💐

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  प्रथम स्थान नमन महाराष्ट्र क़लम की सुगंध मंच दिनांक - १६/१०/२०२० दिन - शुक्रवार विषय - पिता --------------------------------------------- ...